शुरुआत

एसटीपी स्कीम की अवधारणा 1991 में विकसित की गई थी और इसके निम्नलिखित उद्देश्य निरुपित किए गए थे।

  • बुनियादी सुविधाओं के संसाधनों की स्थापना व प्रबंधन। जैसे, आंकड़ा संचार सुविधाएं, कोर कंप्यूटर सुविधाएं, निर्मित स्थान और अन्य सामान्य सुविधाएं।
  • परियोजना अनुमोदन, आयात प्रमाणीकरण, सॉफ्टवेयर मूल्यांकन और सॉफ्टवेयर निर्यातकों के लिए निर्यात प्रमाणन आदि हेतु एकल खिड़की सांविधिक सेवाएं प्रदान करना।
  • प्रौद्योगिकी मूल्यांकन, बाजार विश्लेषण, बाजार विभाजन और विपणन सहायता के माध्यम से और सॉफ्टवेयर सेवाओं के विकास व निर्यात को बढ़ावा देना।
  • पेशेवरों को प्रशिक्षित करने के साथ सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में परिकल्पना विकास को प्रोत्साहित करना।

1990 में तीन अलग-अलग स्वायत्त सोसायटी के माध्यम से पुणे, बंगलूरू और भुवनेश्वर में एसटीपीआई की स्थापना की गई, जिनका विलय बाद में जून, 1991 में एक ही निगमित इकाई में कर दिया गया और जल्द ही नोएडा, गांधी नगर, हैदराबाद और तिरुवनंतपुरम में एसटीपीआई की स्थापना भी की गई। सभी एसटीपीआई को समर्पित अर्थ स्टेशन उपकरणों के साथ आंकड़ा संचार लिंक प्रदान करने हेतु सुसज्जित थे।

भारत सरकार के तत्कालीन इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग ने विश्व बैंक के सहयोग से वैश्विक आईटी उद्योग द्वारा प्रस्तुत अवसरों पर एक अध्ययन किया था। इस अध्ययन में संभावित सॉफ्टवेयर उद्योग के विकास के लिए आवश्यक कारकों की पहचान की गई और साथ ही विश्व बाजार में प्रतिस्पर्धी देशों से तुलना भी की गई। अध्ययन में वैसे कुछ कारकों की स्पष्ट पहचान की गई जिनमें सुधार की आवश्यकता थी और एसटीपीआई में उन कारकों में सुधार पर ध्यान केन्द्रित किया गया।

अंतर्राष्ट्रीय संचार एक ऐसा कारक है जिस पर अधिक ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है और भारत को आयरलैंड के +8 की तुलना में -2 गुणक दिया गया। यह एक प्राथमिक कारण था जिसकी वजह से एसटीपीआई ने विशेष रूप से सॉफ्टवेयर निर्यात उद्योग के लिए अंतरराष्ट्रीय आंकड़ा संचार सुविधाओं में सुधार लाने की जिम्मेदारी ली। हालांकि अंतरराष्ट्रीय संवाहक बनने का इरादा नहीं था, लेकिन एसटीपीआई द्वारा प्रदान सेवा की बेहतर गुणवत्ता और उद्योग से उच्च स्वीकृति दर के कारण एसटीपीआई की अंतरराष्ट्रीय आंकड़ा संचार सेवाओं में किसी की कल्पना से परे बढ़ोतरी हुई। एसटीपीआई वास्तव में बहुत ही कम समय में अपरंपरागत अंतरराष्ट्रीय कैरियर के रूप में उभरी और 26 अंतरराष्ट्रीय संवाहक कंपनियों के साथ रिश्ता बनाने में सफल रही।

1996 से राज्य सरकारें आईटी उद्योग को बढ़ावा देने में बहुत सक्रिय भूमिका निभाने लगीं। कर्नाटक सरकार द्वारा पहली आईटी नीति लाने के बाद, बहुत राज्य सरकारों ने इसका अनुकरण किया। एसटीपीआई की सफलता सिर्फ राजधानियों तक सीमित नहीं थी, अपितु एसटीपीआई के पंख कर्नाटक में मैसूर जैसे माध्यमिक शहरों में भी फैले और अंतिम गिनती तक सिर्फ दो वर्ष की छोटी अवधि में 21 शहरों तक इसका प्रसार हो चुका था।