सॉफ्टवेयर नीति का उद्भव

1984 की पहली कंप्यूटर नीति और 1986 की पहली सॉफ्टवेयर नीति द्वारा आंकड़ा संचार लिंक के माध्य म से सॉफ्टवेयर विकास और निर्यात की अवधारणा पर बल दिया गया। इस नीति का उद्देश्य परिष्कृत कंप्यूटरों पर भारतीय विशेषज्ञता का उपयोग कर भारत में सॉफ्टवेयर विकसित करना था, जिनका शुल्क मुक्त आयात किया जा रहा था। इस तरह, भारत में कम कीमत पर उपलब्ध विशेषज्ञता का उपयोग कर विदेश यात्रा में समय और लागत के खर्च से बचा जा सकता था।

हालांकि, आंकड़ा संचार लिंक में भारी लागत शामिल था। नीति के अनुसार, कंपनियों को अपने प्रारंभिक निवेश से आंकड़ा संचार संपर्क स्थापित करने की अनुमति दी गई थी। उपकरणों का स्वामित्व और गेटवे का संचालन वीएसएनएल के हाथों रखा गया और वीएसएनएल उपयोगकर्ता को परिचालन रखरखाव लागत कटौती के बाद एक निर्धारित अवधि में वापस भुगतान करेगा।

यह प्रति वर्ष आधा भारतीय सर्किट के लिए अधिकतम 45 लाख रुपए प्रति 64 केबीपीएस के रूप में था।

बंगलूरू में अपतटीय विकास की सुविधा के साथ पहली सॉफ्टवेयर कंपनी होने का श्रेय टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स को जाता है। टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स बंगलूरू में वीएसएनएल की मदद से निर्माण व संचालन समझौते के आधार पर अपना गेटवे स्थापित करने वाली भी पहली कंपनी थी।

टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स को छोड़ अन्य कोई कंपनी इस तरह की सुविधा स्थापित करने में सफल नहीं हो सकी। छोटी कंपनियों और अन्य अपतटीय विकास उपयोगकर्ताओं के लिए आंकड़ा संचार की उच्च लागत को वहन करना बहुत महंगा था।

इसके अलावा, सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग से एक अधिकारी को टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स में प्रोटोकॉल विश्लेषक का उपयोग कर आंकड़ा संचार पर नजर रखने व आवश्यक प्रमाण पत्र जारी करने के लिए तैनात किया गया था। टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और अपतटीय विकास की संकल्पना सफल हो सके, यह सुनिश्चित करने हेतु दूरसंचार विभाग, वाणिज्य मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग में संपर्क साधना पड़ा।

वास्तव में, जब सरकार ने 1986 में पहली सॉफ्टवेयर नीति की घोषणा की, कई तरह के मुद्दों को संबोधित किया था।